ऋग्वेद (मंडल 8)
आ ये विश्वा॒ पार्थि॑वानि प॒प्रथ॑न्रोच॒ना दि॒वः । म॒रुतः॒ सोम॑पीतये ॥ (९)
मैं उन्हीं मरुतों को सोमरस पीने के लिए बुलाता हूं. जिन्होंने सभी पार्थिव वस्तुओं एवं तेजस्वी स्वर्गिक वस्तुओं को विस्तृत किया है. (९)
I call the same maruts to drink somras. Who have elaborated all the earthly objects and bright heavenly things. (9)