हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.85.13

मंडल 8 → सूक्त 85 → श्लोक 13 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 85
अव॑ द्र॒प्सो अं॑शु॒मती॑मतिष्ठदिया॒नः कृ॒ष्णो द॒शभिः॑ स॒हस्रैः॑ । आव॒त्तमिन्द्रः॒ शच्या॒ धम॑न्त॒मप॒ स्नेहि॑तीर्नृ॒मणा॑ अधत्त ॥ (१३)
शीघ्रगति वाला एवं दस हजार सेनाओं को साथ लेकर चलने वाला कृष्ण नामक असुर अंशुमती नदी के किनारे रहता था. इंद्र ने उस चिल्लाने वाले असुर को अपनी बुद्धि से खोजा एवं मानव-हित के लिए उसकी वधकारिणी सेनाओं का नाश किया. (१३)
The asura named Krishna, who was quick and carrying ten thousand armies with him, lived on the banks of the River Anshumati. Indra discovered that screaming asura with his wisdom and destroyed his slaughtering armies for the benefit of human beings. (13)