ऋग्वेद (मंडल 8)
सखे॑ विष्णो वित॒रं वि क्र॑मस्व॒ द्यौर्दे॒हि लो॒कं वज्रा॑य वि॒ष्कभे॑ । हना॑व वृ॒त्रं रि॒णचा॑व॒ सिन्धू॒निन्द्र॑स्य यन्तु प्रस॒वे विसृ॑ष्टाः ॥ (१२)
हे मित्र विष्णु! तुम अधिक पराक्रम दिखाओ. हे द्युलोक! तुम वज्र को जाने के लिए स्थान दो. तुम और मैं दोनों वृत्र को मारेंगे व नदियों को सागर की ओर ले जाएंगे. नदियां इंद्र की आज्ञा के अनुसार बहें. (१२)
O friend Vishnu! You show more valour. O dulok! You give the thunderbolt a place to go. You and I will both kill the vritra and lead the rivers to the sea. Rivers flow according to indra's command. (12)