हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.90.1

मंडल 8 → सूक्त 90 → श्लोक 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 90
ऋध॑गि॒त्था स मर्त्यः॑ शश॒मे दे॒वता॑तये । यो नू॒नं मि॒त्रावरु॑णाव॒भिष्ट॑य आच॒क्रे ह॒व्यदा॑तये ॥ (१)
जो मनुष्य यजमान की अभिलाषा पूर्ण करने के लिए मित्र व वरुण को अपने सामने करता है, वह इस प्रकार यज्ञ के लिए हवि तैयार करता है, यह सत्य है. (१)
The man who does the friend and Varuna in front of him to fulfill the desire of the host, thus prepares the havi for the yajna, it is true. (1)