हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.89.9

मंडल 8 → सूक्त 89 → श्लोक 9 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 89
स॒मु॒द्रे अ॒न्तः श॑यत उ॒द्ना वज्रो॑ अ॒भीवृ॑तः । भर॑न्त्यस्मै सं॒यतः॑ पु॒रःप्र॑स्रवणा ब॒लिम् ॥ (९)
जो वज्र समुद्र के बीच में सोता है एवं जो जल से घिरा हुआ है, संग्राम में आगे चलने वाले शत्रु उसी वज्र का उपहार पाते हैं. (९)
The thunderbolt that sleeps in the middle of the sea and which is surrounded by water, the enemies who go ahead in the battle receive the gift of the same thunderbolt. (9)