हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.91.16

मंडल 8 → सूक्त 91 → श्लोक 16 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 91
अग्ने॑ घृ॒तस्य॑ धी॒तिभि॑स्तेपा॒नो दे॑व शो॒चिषा॑ । आ दे॒वान्व॑क्षि॒ यक्षि॑ च ॥ (१६)
हे दीप्तिशाली अग्नि! तुम घृत के खजानों से तृप्त होकर देवों को बुलाओ एवं उनका यजन करो. (१६)
O glorious agni! You, satisfied with the treasures of the abominations, call upon the gods and worship them. (16)