ऋग्वेद (मंडल 8)
तं त्वा॑जनन्त मा॒तरः॑ क॒विं दे॒वासो॑ अङ्गिरः । ह॒व्य॒वाह॒मम॑र्त्यम् ॥ (१७)
हे कवि, मरणरहित, हव्य वहन करने वाले एवं प्रसिद्ध अंगिरा अग्नि! जिस प्रकार माताएं बच्चों को जन्म देती हैं, उसी प्रकार देवों ने तुम्हें उत्पन्न किया है. (१७)
O poet, deathless, human-bearing and famous Angira Agni! Just as mothers give birth to children, so the gods have created you. (17)