हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.103.5

मंडल 9 → सूक्त 103 → श्लोक 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 103
परि॒ दैवी॒रनु॑ स्व॒धा इन्द्रे॑ण याहि स॒रथ॑म् । पु॒ना॒नो वा॒घद्वा॒घद्भि॒रम॑र्त्यः ॥ (५)
हे सोम! तुम इंद्र के साथ एक ही रथ पर बैठकर देवों की सेना के पास जाओ. शुद्ध होते हुए, मरणरहित एवं ऋत्विजों द्वारा ढोये जाते हुए सोम स्तोताओं को धन देते हैं. (५)
Hey Mon! You sit on the same chariot with Indra and go to the army of gods. Being pure, undeterred and carried by the debtors, the Mons give money to the stotas. (5)