हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.14.5

मंडल 9 → सूक्त 14 → श्लोक 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 14
न॒प्तीभि॒र्यो वि॒वस्व॑तः शु॒भ्रो न मा॑मृ॒जे युवा॑ । गाः कृ॑ण्वा॒नो न नि॒र्णिज॑म् ॥ (५)
सोम यजमान की उंगलियों द्वारा इस प्रकार मसले जाते हैं, जिस प्रकार दीप्त अश्व की मालिश की जाती है. (५)
Mon is massaged by the hosts' fingers in the same way as the bright horse is massaged. (5)