हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.24.2

मंडल 9 → सूक्त 24 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 24
अ॒भि गावो॑ अधन्विषु॒रापो॒ न प्र॒वता॑ य॒तीः । पु॒ना॒ना इन्द्र॑माशत ॥ (२)
गतिशील सोम नीचे बहने वाले जल के समान दशापवित्र में पहुंचते हैं एवं प्रसन्न करने के उद्देश्य से इंद्र को व्याप्त करते हैं. (२)
The moving som reaches the Dashapavitra like the water flowing below and permeates Indra for the purpose of pleasing. (2)