हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.25.5

मंडल 9 → सूक्त 25 → श्लोक 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 25
अ॒रु॒षो ज॒नय॒न्गिरः॒ सोमः॑ पवत आयु॒षक् । इन्द्रं॒ गच्छ॑न्क॒विक्र॑तुः ॥ (५)
क्रांत प्रज्ञा वाले एवं दीप्तिशाली सोम अपने समीपवर्ती इंद्र को व्याप्त करके शब्द करते हुए टपकते हैं. (५)
The kranti-pragya wale and the bright-hearted Soma drips in the words by permeating indra near him. (5)