हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.27.3

मंडल 9 → सूक्त 27 → श्लोक 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 27
ए॒ष नृभि॒र्वि नी॑यते दि॒वो मू॒र्धा वृषा॑ सु॒तः । सोमो॒ वने॑षु विश्व॒वित् ॥ (३)
द्युलोक के सिर के समान, अभिलाषापूरक, सर्वज्ञ, निचुड़े हुए एवं काष्ठ पात्रों में रखे हुए सोम तऋत्विजों द्वारा अनेक प्रकार से ले जाए जाते हैं. (३)
Like the head of the dulok, the desire-filled, omniscient, detached and placed in wooden vessels are carried in many ways by the som taritwijas. (3)