हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.28.1

मंडल 9 → सूक्त 28 → श्लोक 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 28
ए॒ष वा॒जी हि॒तो नृभि॑र्विश्व॒विन्मन॑स॒स्पतिः॑ । अव्यो॒ वारं॒ वि धा॑वति ॥ (१)
ये गतिशील, अध्वर्यु द्वारा पात्र पर रखे हुए, सर्वज्ञ व स्तोत्र के स्वामी सोम भेड़ के बालों से बने दशापवित्र पर चलते हैं. (१)
These dynamic, placed on the vessel by Adhwaryu, walk on the dasapavittra made of the hair of the eternal and the lord of the hymn, Som sheep. (1)