हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.40.5

मंडल 9 → सूक्त 40 → श्लोक 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 40
स नः॑ पुना॒न आ भ॑र र॒यिं स्तो॒त्रे सु॒वीर्य॑म् । ज॒रि॒तुर्व॑र्धया॒ गिरः॑ ॥ (५)
हे निचुड़ते हुए सोम! तुम हमारे स्तोताओं के लिए शोभन पुत्र वाला धन लाओ तथा उनकी स्तुतियों को बढ़ाओ. (५)
Oh, lingering Mon! You bring wealth of the Son of Adorn to our stothas and increase their praises. (5)