हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.45.1

मंडल 9 → सूक्त 45 → श्लोक 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 45
स प॑वस्व॒ मदा॑य॒ कं नृ॒चक्षा॑ दे॒ववी॑तये । इन्द॒विन्द्रा॑य पी॒तये॑ ॥ (१)
हे नेताओं को देखने वाले सोम! तुम यज्ञ की पूर्ति एवं इंद्र के पीने के बाद मद तथा सुख के लिए टपको. (१)
O Mon who sees the leaders! You should pour out the fulfillment of the yajna and after indra's drinking, for the item and happiness. (1)