हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.45.2

मंडल 9 → सूक्त 45 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 45
स नो॑ अर्षा॒भि दू॒त्यं१॒॑ त्वमिन्द्रा॑य तोशसे । दे॒वान्सखि॑भ्य॒ आ वर॑म् ॥ (२)
हे सोम! तुम हमारे दूत बनो. तुम इंद्र के पीने के लिए हो. तुम देवों से हमारे लिए प्रिय धन मांगो. (२)
Hey Mon! You be our messenger. You're to drink indra's. You ask the gods for the riches dear to us. (2)