हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.50.2

मंडल 9 → सूक्त 50 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 50
प्र॒स॒वे त॒ उदी॑रते ति॒स्रो वाचो॑ मख॒स्युवः॑ । यदव्य॒ एषि॒ सान॑वि ॥ (२)
हे सोम! तुम जिस समय उन्नत एवं भेड़ के बालों से बने दशापवित्र पर जाते हो, तब तुम्हारी उत्पत्ति के समय यज्ञ करने के अभिलाषी यजमान के मुख से ऋक्‌, यजु एवं साम के रूप में तीन वचन निकलते हैं. (२)
Hey Mon! When you go to the dashapavitra made of advanced and sheep's hair, three words in the form of Rik, Yaju and Sam come out of the mouth of the host who wishes to perform the yajna at the time of your genesis. (2)