ऋग्वेद (मंडल 9)
अ॒यं सूर्य॑ इवोप॒दृग॒यं सरां॑सि धावति । स॒प्त प्र॒वत॒ आ दिव॑म् ॥ (२)
यह सोम सूर्य के समान सारे संसार को देखते हैं, तीस उक्थ पात्रों की ओर जाते हैं एवं स्वर्ग से लेकर पृथ्वी तक सात नदियों को घेरते हैं. (२)
This mon sees the whole world like the sun, goes to the thirty uquth characters and surrounds the seven rivers from heaven to earth. (2)