ऋग्वेद (मंडल 9)
अ॒यं विश्वा॑नि तिष्ठति पुना॒नो भुव॑नो॒परि॑ । सोमो॑ दे॒वो न सूर्यः॑ ॥ (३)
निचोड़े जाते हुए यह सोमदेव सूर्य के समान सभी लोकों के ऊपर रहते हैं. (३)
While squeezed it lives on top of all the realms similar to the Somdev Sun. (3)
मंडल 9 → सूक्त 54 → श्लोक 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation