हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.55.1

मंडल 9 → सूक्त 55 → श्लोक 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 55
यवं॑यवं नो॒ अन्ध॑सा पु॒ष्टम्पु॑ष्टं॒ परि॑ स्रव । सोम॒ विश्वा॑ च॒ सौभ॑गा ॥ (१)
हे सोम! तुम हमें अन्न के साथ पके हुए जौ अधिक मात्रा में दो तथा अन्य सौभाग्यसूचक संपत्तियां भी दो. (१)
Hey Mon! You give us more quantity of cooked barley with grain and other fortunate properties. (1)