हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.54.4

मंडल 9 → सूक्त 54 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 54
परि॑ णो दे॒ववी॑तये॒ वाजा॑ँ अर्षसि॒ गोम॑तः । पु॒ना॒न इ॑न्दविन्द्र॒युः ॥ (४)
हे निचुड़ते हुए एवं इंद्राभिलाषी सोम! तुम हमारे यज्ञ के लिए चारों ओर से गायों से युक्त अन्न बरसाओ. (४)
O nishchading and incorruptible Mon! You shower food containing cows from all around for our yajna. (4)