हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.59.4

मंडल 9 → सूक्त 59 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 59
पव॑मान॒ स्व॑र्विदो॒ जाय॑मानोऽभवो म॒हान् । इन्दो॒ विश्वा॑ँ अ॒भीद॑सि ॥ (४)
हे निचुड़ते हुए सोम! तुम यजमान को सब कुछ दो. तुम उत्पन्न होते ही महान्‌ हो गए थे. दीप्तिशाली सोम! तुम सब शत्रुओं को अपने तेज से पराजित करते हो. (४)
Oh, lingering Mon! You give everything to the host. You were great when you were born. Radiant Mon! You defeat all the enemies with your own speed. (4)