हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.61.14

मंडल 9 → सूक्त 61 → श्लोक 14 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 61
तमिद्व॑र्धन्तु नो॒ गिरो॑ व॒त्सं सं॒शिश्व॑रीरिव । य इन्द्र॑स्य हृदं॒सनिः॑ ॥ (१४)
हमारी स्तुतियां इंद्र के हृदयग्राही सोम को उसी प्रकार भली-भांति बढ़ावें, जैसे बढ़े हुए दूध वाली माताएं बच्चों को बढ़ाती हैं. (१४)
May our praises enhance Indra's heart-taker, Soma, in the same way that mothers with increased milk raise children. (14)