हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.61.16

मंडल 9 → सूक्त 61 → श्लोक 16 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 61
पव॑मानो अजीजनद्दि॒वश्चि॒त्रं न त॑न्य॒तुम् । ज्योति॑र्वैश्वान॒रं बृ॒हत् ॥ (१६)
शुद्ध होते हुए सोम ने वैश्वानर नामक ज्योति को वज्र के समान इसलिए उत्पन्न किया था कि स्वर्ग का विस्तार हो सके. (१६)
While being purified, Som had created a light called Vaishvanar like a thunderbolt so that heaven could expand. (16)