ऋग्वेद (मंडल 9)
ए॒ष स्य परि॑ षिच्यते मर्मृ॒ज्यमा॑न आ॒युभिः॑ । उ॒रु॒गा॒यः क॒विक्र॑तुः ॥ (१३)
बहुतों द्वारा स्तुत एवं क्रांत कर्मो वाले ये सोम मनुष्यों द्वारा शुद्ध होते हुए बहते हैं. (१३)
These somas, which are praised and cursed by many, flow through humans being purified. (13)