हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.62.14

मंडल 9 → सूक्त 62 → श्लोक 14 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 62
स॒हस्रो॑तिः श॒ताम॑घो वि॒मानो॒ रज॑सः क॒विः । इन्द्रा॑य पवते॒ मदः॑ ॥ (१४)
असीमित रक्षाओं वाले, बहुत धन के स्वामी, लोक के निर्माता, क्रांत-कर्म वाले और नशीले सोम इंद्र के लिए टपकते है. (१४)
Those with unlimited defenses, the masters of much wealth, the creator of the folk, the kranta-karma-walas and the intoxicating mon drips for Indra. (14)