हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.62.15

मंडल 9 → सूक्त 62 → श्लोक 15 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 62
गि॒रा जा॒त इ॒ह स्तु॒त इन्दु॒रिन्द्रा॑य धीयते । विर्योना॑ वस॒तावि॑व ॥ (१५)
उत्पन्न एवं स्तुतियों द्वारा प्रशंसित सोम इंद्र के निमित्त इस यज्ञ में इस प्रकार जाते हैं, जैसे पक्षी अपने घोंसले में जाता है. (१५)
The born and admired by the praises go to this yagna for the cause of Som Indra as a bird goes into its nest. (15)