हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.63.20

मंडल 9 → सूक्त 63 → श्लोक 20 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 63
क॒विं मृ॑जन्ति॒ मर्ज्यं॑ धी॒भिर्विप्रा॑ अव॒स्यवः॑ । वृषा॒ कनि॑क्रदर्षति ॥ (२०)
रक्षा की अभिलाषा करते हुए बुद्धिमान्‌ ऋत्विज्‌ उंगलियों की सहायता से मसलने योग्य एवं क्रांतकर्म वाले सोम को मसलते हैं. अभिलाषापूरक एवं शब्द करते हुए सोम धारा के रूप में गिरते हैं. (२०)
While wishing for protection, the wise ritwij with the help of fingers massages the emancipating and revolutionary som. The mons fall as streams while wishing and doing words. (20)