ऋग्वेद (मंडल 9)
वृष॑णं धी॒भिर॒प्तुरं॒ सोम॑मृ॒तस्य॒ धार॑या । म॒ती विप्राः॒ सम॑स्वरन् ॥ (२१)
बुद्धि वाले ऋत्विज् अभिलाषापूरक एवं जल बरसाने वाले सोम को उंगलियों एवं स्तुतियों के साथ जल की धारा के रूप में प्रेरित करते हैं. (२१)
The wise ritwijs inspire the desire-filled and water-showering Mon as a stream of water with fingers and hymns. (21)