ऋग्वेद (मंडल 9)
स नो॑ अर्ष प॒वित्र॒ आ मदो॒ यो दे॑व॒वीत॑मः । इन्द॒विन्द्रा॑य पी॒तये॑ ॥ (१२)
हे दीप्तिशाली, नशीले एवं अतिशय देवाभिलाषी सोम! तुम इंद्र के पीने के लिए हमारे दशापवित्र पर गिरो. (१२)
O glorious, intoxicating and very devabhilashi Mon! You fall on our dashapavittra to drink of Indra. (12)