हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.64.23

मंडल 9 → सूक्त 64 → श्लोक 23 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 64
तं त्वा॒ विप्रा॑ वचो॒विदः॒ परि॑ ष्कृण्वन्ति वे॒धसः॑ । सं त्वा॑ मृजन्त्या॒यवः॑ ॥ (२३)
हे छनते हुए सोम! विद्वान्‌ एवं यज्ञकर्म करने वाले स्तोता तुम्हें अलंकृत करते हैं और मनुष्य तुम्हें भली प्रकार मसलते हैं. (२३)
That's it, Mon! The scholars and the hymns who perform the yajnakarma decorate you and the human beings groom you well. (23)