हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.65.24

मंडल 9 → सूक्त 65 → श्लोक 24 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 65
ते नो॑ वृ॒ष्टिं दि॒वस्परि॒ पव॑न्ता॒मा सु॒वीर्य॑म् । सु॒वा॒ना दे॒वास॒ इन्द॑वः ॥ (२४)
वे निचोड़े गए, दीप्तिशाली एवं चमस आदि पात्रों में टपकते हुए सोम हमें आकाश से होने वाली वर्षा एवं शोभन बलयुक्त पुत्र दें. (२४)
They are squeezed, glistened and dripping in the chamas, and so on, give us a son with the rain and the adornment force from the sky. (24)