हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 65
हि॒न्वन्ति॒ सूर॒मुस्र॑यः॒ स्वसा॑रो जा॒मय॒स्पति॑म् । म॒हामिन्दुं॑ मही॒युवः॑ ॥ (१)
हे सोम! कार्यकुशल एवं परस्पर मित्रता रखने वाली मेरी उंगलियां रूपी स्त्रियां तुम्हारा रस निचोड़ने की अभिलाषा से तुम्हारे क्षरण को प्रेरित करती हैं. तुम शोभन-वीर्य वाले, सबके पालनकर्ता, महान्‌ एवं दीप्तिशाली हो. (१)
Hey Mon! Women like my fingers, who are efficient and friendly, inspire your erosion by the desire to squeeze your juice. You are a man of adornment, a man of adornment, a nurturer of all, a great and a radiant. (1)

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 65
पव॑मान रु॒चारु॑चा दे॒वो दे॒वेभ्य॒स्परि॑ । विश्वा॒ वसू॒न्या वि॑श ॥ (२)
हे दशापवित्र से छनते हुए सोम! तुम अपने संपूर्ण तेज के द्वारा दीप्त होकर देवों के पास से सब धन हमें दो. (२)
O Mon, filtering from Dashapavittra! You are illuminated by your entire glory and give us all the wealth from the gods. (2)

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 65
आ प॑वमान सुष्टु॒तिं वृ॒ष्टिं दे॒वेभ्यो॒ दुवः॑ । इ॒षे प॑वस्व सं॒यत॑म् ॥ (३)
हे शुद्ध होते हुए सोम! तुम देवों की शोभा के लिए शोभन स्तुति वाली वर्षा करो एवं अन्न के लिए हमारे पास वर्षा को भेजो. (३)
O you are pure, Mon! You should rain with praise for the glory of the gods and send it to us for food. (3)

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 65
वृषा॒ ह्यसि॑ भा॒नुना॑ द्यु॒मन्तं॑ त्वा हवामहे । पव॑मान स्वा॒ध्यः॑ ॥ (४)
हे सोम! तुम अभिमत फल देने वाले हो. हे शुद्ध होते हुए सोम! हम शोभन कर्म वाले लोग तेजोदीप्त तुमको अपने यज्ञो में बुलाते हैं. (४)
O Mon! You are going to give opinion fruit. O Soma, being purified! We, the people of shobhan karma, invite you in our sacrifices. (4)

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 65
आ प॑वस्व सु॒वीर्यं॒ मन्द॑मानः स्वायुध । इ॒हो ष्वि॑न्द॒वा ग॑हि ॥ (५)
हे शोभन-आयुधों वाले सोम! तुम देवों को प्रसन्न करते हुए हमें शोभन वीर्य वाला पुत्र दो एवं इस यज्ञ में आओ. (५)
O Shobhan-armed Mon! You please the gods, give us a son with a good semen and come to this yagna. (5)

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 65
यद॒द्भिः प॑रिषि॒च्यसे॑ मृ॒ज्यमा॑नो॒ गभ॑स्त्योः । द्रुणा॑ स॒धस्थ॑मश्नुषे ॥ (६)
हे सोम! तुम दोनों हाथों से मसले एवं जल से भिगोए जाते हो. तुम द्रोणपात्र में ठहरकर चमस आदि पात्रों में भरे जाते हो. (६)
Hey Mon! You are soaked with mashed and water with both hands. You stay in the dronapatra and are filled in spoons, etc. containers. (6)

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 65
प्र सोमा॑य व्यश्व॒वत्पव॑मानाय गायत । म॒हे स॒हस्र॑चक्षसे ॥ (७)
हे स्तोताओ! तुम दशापवित्र से छनते हुए महान्‌ एवं हजारों स्तुतियों वाले सोम की प्रशंसा में व्यश्च ऋषि के समान गीत गाओ. (७)
This stotao! You sing songs like a sage in praise of the great and thousands of praises of The Great and Thousands of Praises, while filtering from dasapapvittra. (7)

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 65
यस्य॒ वर्णं॑ मधु॒श्चुतं॒ हरिं॑ हि॒न्वन्त्यद्रि॑भिः । इन्दु॒मिन्द्रा॑य पी॒तये॑ ॥ (८)
हे अध्वर्युगण! तुम शत्रुओं को रोकने वाले, रस टपकाने वाले, हरे रंग से युक्त एवं दीप्तिशाली सोम को इंद्र के पीने के निमित्त पत्थरों की सहायता से निचोड़ो. (८)
O teacher! You squeeze the evil-stopper, the juice-dripping, the green-coloured and the radiant Som with the help of stones for Indra's drinking. (8)
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