हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.66.20

मंडल 9 → सूक्त 66 → श्लोक 20 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 66
अ॒ग्निरृषिः॒ पव॑मानः॒ पाञ्च॑जन्यः पु॒रोहि॑तः । तमी॑महे महाग॒यम् ॥ (२०)
अग्नि पांचों वर्णो के हितैषी, सबके द्रष्टा, पवित्र होते हुए पुरोहित एवं यजमानों द्वारा स्तुत्य हैं. हम अग्नि से याचना करते हैं. (२०)
Agni is the benefactor of the five varnas, the seer of all, the holy one, the priest and the host. We beg of agni. (20)