हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.66.21

मंडल 9 → सूक्त 66 → श्लोक 21 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 66
अग्ने॒ पव॑स्व॒ स्वपा॑ अ॒स्मे वर्चः॑ सु॒वीर्य॑म् । दध॑द्र॒यिं मयि॒ पोष॑म् ॥ (२१)
हे शोभन कर्म वाले अग्नि! तुम हमें शोभन शक्ति वाला तेज, धन एवं गाएं प्रदान करो. (२१)
O agni of good deeds! You give us the loudest, wealth and singing with the power of adornment. (21)