ऋग्वेद (मंडल 9)
अग्ने॒ पव॑स्व॒ स्वपा॑ अ॒स्मे वर्चः॑ सु॒वीर्य॑म् । दध॑द्र॒यिं मयि॒ पोष॑म् ॥ (२१)
हे शोभन कर्म वाले अग्नि! तुम हमें शोभन शक्ति वाला तेज, धन एवं गाएं प्रदान करो. (२१)
O agni of good deeds! You give us the loudest, wealth and singing with the power of adornment. (21)