हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.67.17

मंडल 9 → सूक्त 67 → श्लोक 17 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 67
असृ॑ग्रन्दे॒ववी॑तये वाज॒यन्तो॒ रथा॑ इव ॥ (१७)
जिस प्रकार शत्रुधनों के इच्छुक लोग रथ भेजते हैं, उसी प्रकार ऋत्विजों ने अन्न वाले सोम को देवों के लिए दिया है. (१७)
Just as those desirous of enemies send chariots, similarly the Ritvijas have given the som of food for the devas. (17)