ऋग्वेद (मंडल 9)
ए॒ष तु॒न्नो अ॒भिष्टु॑तः प॒वित्र॒मति॑ गाहते । र॒क्षो॒हा वार॑म॒व्यय॑म् ॥ (२०)
हे सोम! तुम पत्थरों से कुचले हुए एवं स्तोताओं द्वारा प्रशंसित होकर राक्षसों का हनन कर दो एवं भेड़ के बालों से बने दशापवित्र को लांघकर द्रोणकलश में आओ. (२०)
Hey Mon! You, crushed with stones and admired by hymns, destroy the demons and come to Dronakalash by crossing the dashapavittra made of sheep's hair. (20)