ऋग्वेद (मंडल 9)
पव॑मानः॒ सो अ॒द्य नः॑ प॒वित्रे॑ण॒ विच॑र्षणिः । यः पो॒ता स पु॑नातु नः ॥ (२२)
वे सबके द्रष्टा, पवित्र होते हुए एवं दशापवित्र से छने हुए सोम हमें पापरहित करें. (२२)
May they all be seers, being holy and stripped of dasapavittra, make us sinless. (22)