ऋग्वेद (मंडल 9)
यत्ते॑ प॒वित्र॑मर्चि॒वदग्ने॒ तेन॑ पुनीहि नः । ब्र॒ह्म॒स॒वैः पु॑नीहि नः ॥ (२४)
हे अग्नि! तुम्हारा जो शोभनकिरणों वाला तेज है, अपने उसी तेज से हमें पापरहित करो तथा सोमरस निचोड़ने की क्रियाओं से हमें पवित्र करो. (२४)
O agni! Make us sinless with your own swiftness, and sanctify us with the actions of squeezing the somras. (24)