हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.67.25

मंडल 9 → सूक्त 67 → श्लोक 25 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 67
उ॒भाभ्यां॑ देव सवितः प॒वित्रे॑ण स॒वेन॑ च । मां पु॑नीहि वि॒श्वतः॑ ॥ (२५)
हे सबके प्रेरक एवं दीप्तिशाली सोम! तुम अपने पवित्र तेज एवं निचुड़ने की क्रिया- इन दोनों से मुझे सभी प्रकार पापरहित करो. (२५)
O inspiring and glorious Mon of all! You must make me sinless in all respects with your holy swiftness and your act of easing— both of these. (25)