हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.68.4

मंडल 9 → सूक्त 68 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 68
स मा॒तरा॑ वि॒चर॑न्वा॒जय॑न्न॒पः प्र मेधि॑रः स्व॒धया॑ पिन्वते प॒दम् । अं॒शुर्यवे॑न पिपिशे य॒तो नृभिः॒ सं जा॒मिभि॒र्नस॑ते॒ रक्ष॑ते॒ शिरः॑ ॥ (४)
मेधावी सोम द्यावा-पृथिवी के बीच घूमते हुए एवं अंतरिक्ष के जल को बरसने की प्रेरणा देते हुए शत्रुओं के साथ उत्तरवेदी को सीचते है. सोम ऋत्विजों द्वारा जौ के सत्तू में मिलाए जाते हैं, उंगलियों से मिलते हैं एवं प्राणियों की रक्षा करते हैं. (४)
The meritorious Som moves between Dyava-Prithvi and inspires the waters of space to rain down, and sews up the North-Vedi with the enemies. The soms are mixed with the sattu of barley by the ritwijas, meet the fingers and protect the animals. (4)