हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.68.5

मंडल 9 → सूक्त 68 → श्लोक 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 68
सं दक्षे॑ण॒ मन॑सा जायते क॒विरृ॒तस्य॒ गर्भो॒ निहि॑तो य॒मा प॒रः । यूना॑ ह॒ सन्ता॑ प्रथ॒मं वि ज॑ज्ञतु॒र्गुहा॑ हि॒तं जनि॑म॒ नेम॒मुद्य॑तम् ॥ (५)
जल के गर्भ, देवों द्वारा नियंत्रित एवं क्रांत कर्म वाले सोम बढ़े हुए मन से धरती पर जन्म लेते हैं. युवा सूर्य एवं सोम जन्म के समय से ही अलग-अलग जाने जाते हैं. उनका आधा जन्म प्रकाशित एवं आधा छिपा रहता है. (५)
The womb of water, controlled by the gods and the somas with kranta karma are born on the earth with an enlarged mind. Young Sun and Mon are known separately since the time of birth. Half of his birth is published and half is hidden. (5)