हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.73.3

मंडल 9 → सूक्त 73 → श्लोक 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 73
प॒वित्र॑वन्तः॒ परि॒ वाच॑मासते पि॒तैषां॑ प्र॒त्नो अ॒भि र॑क्षति व्र॒तम् । म॒हः स॑मु॒द्रं वरु॑णस्ति॒रो द॑धे॒ धीरा॒ इच्छे॑कुर्ध॒रुणे॑ष्वा॒रभ॑म् ॥ (३)
शुद्ध करने की शक्ति से युक्त सोमरस की किरणें माध्यमिका वाकू के चारों ओर बैठती हैं. इन किरणों के प्राचीन पिता सोम प्रकाशनरूप कर्म की रक्षा करते हैं. अपने तेज से सबको ढकने वाले सोम अपनी किरणों से अंतरिक्ष को ढकते हैं. धीर ऋत्विज्‌ सबको धारण करने वाले जल में सोम को मिलाना आरंभ करते हैं. (३)
The rays of the somras with the power of purifying sit around the secondary vaku. The ancient father of these rays protects the som prakashanrup karma. Mon, who covers everyone with his brightness, covers the space with his rays. Dhir Ritwij begins to mix som in the water that everyone holds. (3)