हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.73.6

मंडल 9 → सूक्त 73 → श्लोक 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 73
प्र॒त्नान्माना॒दध्या ये स॒मस्व॑र॒ञ्छ्लोक॑यन्त्रासो रभ॒सस्य॒ मन्त॑वः । अपा॑न॒क्षासो॑ बधि॒रा अ॑हासत ऋ॒तस्य॒ पन्थां॒ न त॑रन्ति दु॒ष्कृतः॑ ॥ (६)
स्तुति के अनुसार चलने वाली एवं शीघ्रगति का अभिमान करने वाली सोम की किरणें प्राचीन अंतरिक्ष से एक साथ उत्पन्न हुई थीं. ज्ञान-दृष्टि से शून्य एवं देवों की स्तुतियां न सुनने वाले पापी लोग उन किरणों का त्याग कर देते हैं. पापी लोग सत्य के मार्ग से चलकर पार नहीं पहुंचते. (६)
The rays of The Mon, which followed according to praise and boasted of speeding, originated together from ancient space. From the point of view of knowledge, sinners who do not listen to the zero and praises of gods give up those rays. Sinners do not walk through the path of truth. (6)