हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.73.8

मंडल 9 → सूक्त 73 → श्लोक 8 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 73
ऋ॒तस्य॑ गो॒पा न दभा॑य सु॒क्रतु॒स्त्री ष प॒वित्रा॑ हृ॒द्य१॒॑न्तरा द॑धे । वि॒द्वान्स विश्वा॒ भुव॑ना॒भि प॑श्य॒त्यवाजु॑ष्टान्विध्यति क॒र्ते अ॑व्र॒तान् ॥ (८)
यज्ञ के रक्षक एवं शोभन कर्म वाले सोम को कोई रोकता नहीं. सोम अपने हृदय में तीन पवित्रों-अग्नि, वायु एवं सूर्य को धारण करते हैं. सब कुछ जानने वाले सोम सब लोकों को देखते हैं एवं यज्ञकर्म न करने वाले अप्रिय लोगों को नीचे की ओर मुंह करके पीड़ित करते हैं. (८)
No one stops the protector of the yajna and the sobhan karma-wielding Mon. Soma holds in his heart three holy ones - agni, air and sun. Som, who knows everything, sees all the lokas and suffers the unpleasant people who do not perform the yajnakarma by facing downwards. (8)