हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.76.4

मंडल 9 → सूक्त 76 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 76
विश्व॑स्य॒ राजा॑ पवते स्व॒र्दृश॑ ऋ॒तस्य॑ धी॒तिमृ॑षि॒षाळ॑वीवशत् । यः सूर्य॒स्यासि॑रेण मृ॒ज्यते॑ पि॒ता म॑ती॒नामस॑मष्टकाव्यः ॥ (४)
जगत्‌ के राजा सोम निचुड़ते हैं. स्वर्ग को देखने वाले इंद्र के कर्म ऋषियों से भी उत्तम है. सोम ने इंद्र के यज्ञकर्म की कामना की. सोम सूर्य की किरणों द्वारा शुद्ध होते हैं. हमारी स्तुतियों के पालनकर्ता सोम का कर्म कवियों से उत्कृष्ट है. (४)
The king of the world, Som, is nichudata. Indra's karma who sees heaven is better than that of the sages. Som wished for Indra's yajnakarma. Som is purified by the rays of the sun. The karma of Som, the follower of our praises, is superior to that of the poets. (4)