हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.84.1

मंडल 9 → सूक्त 84 → श्लोक 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 84
पव॑स्व देव॒माद॑नो॒ विच॑र्षणिर॒प्सा इन्द्रा॑य॒ वरु॑णाय वा॒यवे॑ । कृ॒धी नो॑ अ॒द्य वरि॑वः स्वस्ति॒मदु॑रुक्षि॒तौ गृ॑णीहि॒ दैव्यं॒ जन॑म् ॥ (१)
हे देवों को प्रसन्न करने वाले, विशेषद्रष्टा एवं जल देने वाले सोम! तुम इंद्र, वरुण एवं वायु के लिए टपको, हमें विनाशरहित धन दो एवं इस विशाल धरती पर मुझे देवों का भक्त कहकर पुकारो. (१)
O Som who pleases the gods, the special seer and the giver of water! You tap for Indra, Varuna and Vayu, give us money without destruction and call me a devotee of the gods on this vast earth. (1)