हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.86.1

मंडल 9 → सूक्त 86 → श्लोक 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 86
प्र त॑ आ॒शवः॑ पवमान धी॒जवो॒ मदा॑ अर्षन्ति रघु॒जा इ॑व॒ त्मना॑ । दि॒व्याः सु॑प॒र्णा मधु॑मन्त॒ इन्द॑वो म॒दिन्त॑मासः॒ परि॒ कोश॑मासते ॥ (१)
हे पवमान सोम! तुम्हारे व्यापक, मन के समान तेज चाल वाले तथा नशीले रस, तेज चलने वाली घोड़ियों के बछड़ों के समान स्वयं ही चलते है. स्वर्ग में उत्पन्न, शोभन पत्तों वाले, मधुरतायुक्त एवं अत्यंत नशीले रस द्रोणकलश में जाते हैं. (१)
O Pawman Mon! Your broad, mind-like, fast-paced and intoxicating juices run on their own, like the calves of fast-moving horses. The sweet, sweet and intoxicating juices produced in heaven go to dronakalash. (1)