ऋग्वेद (मंडल 9)
स॒प्त स्वसा॑रो अ॒भि मा॒तरः॒ शिशुं॒ नवं॑ जज्ञा॒नं जेन्यं॑ विप॒श्चित॑म् । अ॒पां ग॑न्ध॒र्वं दि॒व्यं नृ॒चक्ष॑सं॒ सोमं॒ विश्व॑स्य॒ भुव॑नस्य रा॒जसे॑ ॥ (३६)
माता जिस प्रकार बालक के पास जाती है, उसी प्रकार सात नदियां नवीन उत्पन्न, जीतने वाले, विद्वान्, जलों को जन्म देने वाले, जलधारणकर्त्ता, स्वर्ग में उत्पन्न एवं मानवों को देखने वाले सोम के पास जाती हैं. (३६)
Just as the mother goes to the child, so the seven rivers go to the new born, the conqueror, the scholar, the giver of the waters, the water-giver, the one born in heaven and the so-called the soma who sees the human beings. (36)