हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.86.35

मंडल 9 → सूक्त 86 → श्लोक 35 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 86
इष॒मूर्जं॑ पवमाना॒भ्य॑र्षसि श्ये॒नो न वंसु॑ क॒लशे॑षु सीदसि । इन्द्रा॑य॒ मद्वा॒ मद्यो॒ मदः॑ सु॒तो दि॒वो वि॑ष्ट॒म्भ उ॑प॒मो वि॑चक्ष॒णः ॥ (३५)
हे पवमान सोम! तुम अन्न और बल को प्राप्त करते हो. बाज जिस प्रकार अपने घोंसले में जाता है, उसी प्रकार तुम कलशों में स्थित होते हो. हे सोम! तुम स्वर्ग के समान, स्वर्ग को साधने वाले एवं विशेष द्रष्टा हो. तुम्हारा नशीला रस इंद्र के लिए निचोड़ा गया है. (३५)
O Pawman Mon! You receive food and strength. Just as the hawk goes into its nest, you are located in the kalash. Hey Mon! You are like heaven, the seekers of heaven and the special seers. Your intoxicating juice has been squeezed to Indra. (35)